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                                       संस्थापक व अध्यक्ष

मेरा नाम डा० सम्पूर्णानन्द पाण्डेय है। मैं, बी.एच.एम.एस. डाक्टर हूँ जो कि मैने अपनी होम्योपैथिक दवाओं से पिछले पाँच सालो से निरन्तर गरीब व असहाय लोगो का निःशुल्क उपचार कर रहा हूँ। मैंने अपने देश के कई राज्यों में कई अस्पतालो में भ्रमण करने के दौरान ये अनुभव किया कि किसी भी गरीब व्यक्ति को जो जटिल बिमारी का इलाज कराने हेतु रुपयों की आवश्यकता होती है। हमारे देश की युवा पीढ़ी व आने वाली (युवा) पीढ़ी गरीबी व धन के अभाव में शिक्षा से वंचित हो रही है उन्हे शिक्षित बनाने की आवश्यकता है आज अपराध का मूल कारण बेरोजगारी व अशिक्षा है। मैने अनुभव किया अपनी माताओ व बहनो को देखकर जो कि माहवारी से होने वाली समस्याओं जिससे निपटने के लिए माताओ व बहनो के लिए सेनेटरी पैड की व्यवस्था कराना अति आवश्यक है।

मैने अनुभव किया है कि जो लोग विकलांग होते है अनको देखकर लोग घृणा करते है, उन्हे पास तक नहीं बैठाना चाहते है कुछ लोग उन्हे दया भाव से देखते है, पर हम उन विकलांग लोगो के लिए कृत्रिम अंगों की व्यवस्था करना चाहते है, जिससे वो भी समाज मे सर उठाकर जी सकें मैने देखा कि लोग अपने बुर्जुग माता पिता को घर से निकाल देते है जो कि मजबूर होकर सड़को पर भीख माँगकर अपना जीवन जीने पर मजबूर है हम उनके लिये वृद्धा आश्रम का निर्माण करना चाहते है जिससे उनका जीवन बेहतर हो सके। मैने अनुभव किया कि मूक बधिर बच्चो को ट्रेनिंग देने की आवश्यकता है जिससे उन्हे अपना जीवन जीने में आसानी हो सके मैने अनुभव किया कि जो छोटे-छोटे बच्चे हर चौराहे पर भीख माँगते नजर आते है उनके लिए एक अनाथालय व शिक्षाकेन्द्र की स्थापना की जाये ताकि उन्हे एक बेहतर भविष्य मिल सके। मैने ये भी अनुभव किया कि अशिक्षा के कारण व्यक्ति को अपने अधिकारो का ज्ञान नहीं है हमारे देश में करप्शन हावी है इसको खत्म करने के लिये हर व्यक्ति को अपने अधिकारो का ज्ञान होना चाहिए। मैंने ये भी अनुभव किया कि जिन परिवारों में चार-पांच बेटियों है वो गरीब माँ बाप अपनी बेटियो को शिक्षा नहीं दिला पाते और न ही उनका विवाह करा पाते है।

मैंने इन सभी समस्याओ को देखते हुये ये अनुभव किया और मैने इस ट्रस्ट की स्थापना की जिससे भारत के सभी गाँव-गाँव तक ये सुविधाओं का लाभ जन जन तक पहुंचाया जा सके जिससे हमारे देश प्रदेश का नाम हो। और ग़रीबों व अनाथों का सहयोग किया जा सके।

डॉ. एस. एन. पांडेय

धन्यवाद

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